चर्चा में क्यों : तीन दिवसीय हिंद-प्रशांत संवाद 2025 नई दिल्ली (मानेकशॉ सेंटर) में 28 से 30 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित हुआ। यह इसका 7 वां सातवाँ संस्करण था, जिसका मूल विषय ‘समग्र समुद्री सुरक्षा और विकास को बढ़ावा: क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और क्षमता संवर्धन‘ है। इस संवाद में हिंद-प्रशांत क्षेत्र एवं साझेदार देशों के तीस से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में क्षेत्रीय समुद्री स्थिरता और विकास के लिये सहयोगात्मक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
इस संवाद के प्रमुख बिंदु:
- ब्लू इकॉनमी और सीबेड इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा
- साउथ चाइना सी में ग्रे जोन गतिविधियों से उत्पन्न जटिलताओं को रेखांकन
- शिपबिल्डिंग और शिपिंग जैसे समुद्री क्षेत्रों के पुनर्जीवन के लिए भारत सरकार के ठोस कदमों पर प्रकाश डाला
- दक्षिणी प्रशांत द्वीप देशों की बढ़ती प्रासंगिकता और उनके साथ साझेदारी एवं सहयोग को सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
- IORA, IONS (इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम), IOC (इंडियन ओशन कमीशन) और AOIP (आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक) जैसे प्रमुख क्षेत्रीय तंत्रों के बीच अधिक प्रभावी तालमेल व समन्वय विकसित करने के तरीकों पर गहन चर्चा की।
भारत के लिये हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्त्व:
- समुद्री सुरक्षा और सामरिक स्वायत्तता:
- भारत का 95% से अधिक व्यापार हिंद महासागर से होकर गुज़रता है, जिससे यह क्षेत्र भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाता है।
- भारत के SAGAR (Security and Growth for All in the Region-क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा और विकास) तथा MAHASAGAR ((Monitor, Assess, Harmonise, and Synergize for All Government Agencies for Resources) सिद्धांत समावेशी समुद्री समृद्धि एवं सुरक्षा पर बल देते हैं।
- भारत ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे सामरिक मार्गों (चोकपॉइंट्स) के निकट अपनी नौसैनिक उपस्थिति को मज़बूत किया है, ताकि ऊर्जा तथा व्यापार प्रवाह की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- आर्थिक विकास और व्यापार एकीकरण:
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र “चाइना+1” रणनीति का प्रमुख केंद्र है, जो उत्पादन विविधीकरण और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को सक्षम बनाता है।
- भारत की हिंद-प्रशांत आर्थिक ढाँचा (IPEF- Indo-Pacific Economic Framework for Prosperity) में भागीदारी और ऑस्ट्रेलिया तथा UAE के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) व्यापार की लचीलापन और मज़बूती बढ़ाते हैं।
- भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC- India-Middle East-Europe Economic Corridor) हिंद-प्रशांत क्षेत्र के माध्यम से संयुक्त कनेक्टिविटी को मज़बूत करता है।
- रसद और कनेक्टिविटी:
- सागरमाला परियोजना और चाबहार बंदरगाह जैसी समुद्री अवसंरचना परियोजनाएँ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को सुधारने के उद्देश्य से बनाई गई हैं।
- जलवायु परिवर्तन और ब्लू इकॉनमी:
- इस क्षेत्र को गंभीर जलवायु खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे- समुद्र स्तर में वृद्धि, चक्रवात और प्रवाल भित्तियों का क्षरण।
- भारत ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) में सहयोग को बढ़ावा देता है, जो IORA, आपदा रोधी बुनियादी ढाँचे के लिये गठबंधन (CDRI- Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) और सतत् समुद्री शासन के लिये साझेदारियों के माध्यम से समर्थित है।
- राजनयिक और मानक नेतृत्व:
- भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र का उपयोग खुद को सभ्यात्मक लोकतंत्र और वैश्विक दक्षिण का नेता के रूप में प्रस्तुत करने के लिये करता है।
- IORA की अध्यक्षता (2025–27) और वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन (VOGSS) (2024) जैसी पहलों के माध्यम से भारत समावेशी एवं नियम-आधारित समुद्री शासन को मज़बूत करता है