चर्चा में क्यों : 22वां आसियान-भारत शिखर सम्मेलन 26 अक्टूबर, 2025 को कुआलालंपुर में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। यह भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की 12वीं भागीदारी थी। यह सम्मलेन 47वां दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ- आसियान शिखर सम्मेलन के साथ ही आयोजित किया गया । इस सम्मेलन की अध्यक्षता मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम ने की ।
आसियान-भारत शिखर सम्मेलन 2025 के सम्बन्ध में भारतीय पक्ष :
- भारतीय प्रधानमंत्री ने तिमोर-लेस्ते को आसियान का 11वां सदस्य बनने पर बधाई दी
- भारत ने आसियान कम्यूनिटी विज़न 2045 को अपनाने के लिए आसियान की सराहना की और आसियान एकता, आसियान केन्द्रीयता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर आसियान दृष्टिकोण के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया।
- आसियान-भारत एफटीए की समीक्षा: भारत ने ज़ोर दिया कि FTA की शीघ्र समीक्षा से दोनों पक्षों के लोगों को लाभ होगा और क्षेत्रीय सहयोग मज़बूत होगा।
- भारत आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है और उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकता के महत्व पर बल दिया
- रणनीतिक साझेदारी: आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी (2026-2030) को लागू करने के लिए आसियान-भारत कार्य योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तारित समर्थन।
- समुद्री सहयोग:
- वर्ष 2026 को “आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष” के रूप में नामित करना, ताकि नीली अर्थव्यवस्था में साझेदारी बन सके।
- सुरक्षित समुद्री वातावरण के लिए द्वितीय आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की बैठक और द्वितीय आसियान-भारत समुद्री अभ्यास आयोजित करने का प्रस्ताव।
- लोथल, गुजरात में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन समुद्री विरासत महोत्सव और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर एक सम्मेलन का आयोजन।
- आपदा प्रबंधन:
- भारत पड़ोस में संकट के समय प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता की अपनी भूमिका जारी रखेगा।
- आपदा तैयारी और एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) में सहयोग को और मज़बूत करना।
- पर्यटन और संस्कृति: 2025 को आसियान-भारत पर्यटन वर्ष मनाना।
- संस्थागत विकास: क्षेत्रीय विशेषज्ञता विकसित करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय में दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र की प्रस्तावित स्थापना।
- ऊर्जा, तकनीक तथा अन्य सहयोग:
- आसियान पावर ग्रिड पहल को समर्थन देने के लिए अक्षय ऊर्जा में 400 पेशेवरों को प्रशिक्षण।
- शिक्षा, ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिनटेक और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में चल रहे सहयोग का समर्थन जारी रखना।
- इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, उभरती प्रौद्योगिकियों, दुर्लभ मृदा तत्त्व और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल।